शैक्षणिक संस्थान बंद रहने के बावजूद आरकेएमवी शिमला में बिजली और टेलीफोन बिलों पर 6.84 लाख रुपये से अधिक खर्च किए जाने का मामला सामने आया है।
कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान लंबे समय तक शैक्षणिक संस्थान बंद रहने के बावजूद आरकेएमवी शिमला में बिजली और टेलीफोन बिलों पर 6.84 लाख रुपये से अधिक खर्च किए जाने का मामला सामने आया है। हिमाचल प्रदेश सरकार के ऑडिट में इस बाबत सवाल उठे हैं। कॉलेज प्रिंसिपल को व्यय का पूरा औचित्य स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा जिला ऊना के अंब कॉलेज में हिमाचली बोनाफाइड छात्राओं से ट्यूशन फीस लेने का प्रावधान नहीं होने के बावजूद 34,200 रुपये की वसूली भी हुई है। राज्य ऑडिट विभाग ने इस व्यय पर आपत्ति जताते हुए संबंधित संस्थान से जवाब तलब किया है। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2019-20 में कोविड-19 महामारी के चलते 16 मार्च 2020 से 12 फरवरी 2021 तक प्रदेश के शैक्षणिक संस्थान बंद रहे।
इस दौरान छात्रावास और कार्यालय गतिविधियां भी सीमित रहीं। इसके बावजूद आरकेएमवी के छात्रावास निधि और छात्र निधि से बिजली तथा टेलीफोन बिलों पर कुल 6,83,733 रुपये खर्च किए गए। ऑडिट टीम ने इसे परिस्थितियों के अनुरूप असामान्य व्यय माना है। रिपोर्ट के अनुसार छात्रावास अमलगमेटेड फंड से कई किस्तों में बिजली बिल जमा किए गए। इसके अलावा टेलीफोन बिल का भुगतान भी छात्रावास निधि से किया गया। वहीं छात्र फंड से कार्यालय के बिजली बिलों का भुगतान किया गया, जिस पर भी ऑडिट ने आपत्ति जताई है। ऑडिट के अनुसार लॉकडाउन अवधि में संस्थान बंद रहने से बिजली और दूरसंचार खर्च सीमित होना चाहिए था, जबकि वास्तविक खर्च अपेक्षा से अधिक पाया गया।
रिपोर्ट में अप्रैल 2020 से जून 2021 के बीच जमा किए गए विभिन्न बिजली बिलों और टेलीफोन बिलों का विस्तृत विवरण दर्ज किया गया है। ऑडिट अभियान संख्या एसकेएफ-एजी/स्टेट ऑडिट-2025-114 के तहत 8 अगस्त 2025 के तहत इस मामले को दर्ज किया गया है। संस्थान को निर्देश दिए गए हैं कि व्यय का पूरा औचित्य स्पष्ट किया जाए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित स्रोत में राशि की प्रतिपूर्ति सुनिश्चित की जाए। आरकेएमवी कॉलेज की ओर से प्रारंभिक जवाब में बताया गया है कि मामले की संस्थान स्तर पर जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी और विस्तृत रिपोर्ट ऑडिट विभाग को भेजी जाएगी।
उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने बताया कि ऑडिट आपत्ति के बारे में कॉलेज प्रबंधन से जवाबतलब किया जाएगा। उधर, कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि कोविड लॉकडाउन के दौरान बिजली का स्वीकृत लोड अधिक होने के चलते बिल अधिक आया है। अब लोड को कम दिया गया है। जिससे सालाना साढ़े तीन लाख रुपये की बचत हो रही है।
