हिमाचल राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस प्रत्याशी पर संशय बरकरार, भाजपा का भी बढ़ा इंतजार

हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट के लिए होने वाले चुनाव को लेकर राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस की ओर से प्रत्याशी के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं होने से भाजपा भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और अंतिम फैसला टाल रही है। पढ़ें पूरी खबर…

हिमाचल प्रदेश की राज्यसभा सीट को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है, लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी को लेकर संशय अब भी बरकरार है। पार्टी की ओर से प्रत्याशी के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं होने से भाजपा भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और अंतिम फैसला टाल रही है। माना जा रहा है कि कांग्रेस प्रत्याशी की घोषणा के बाद ही भाजपा अपनी चुनावी रणनीति तय करेगी।

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार राज्यसभा प्रत्याशी का नाम तय हो चुका है, बुधवार को नाम का एलान होगा। उधर, नामांकन प्रक्रिया विधानसभा परिसर में बुधवार को पूरी की जाएगी। नामांकन से पहले कांग्रेस विधायक दल की बैठक भी प्रस्तावित है, जिसमें चुनाव रणनीति पर चर्चा होगी।

कांग्रेस प्रत्याशी को लेक पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा, कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल, मुख्यमंत्री सुक्खू के राजनीतिक सलाहकार सुनील कुमार बिट्टू, कैबिनेट मंत्री धनीराम शांडिल और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा के नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहे हैं। इन अटकलों के बीच आनंद शर्मा मंगलवार शाम ॉकसौली पहुंचे। बुधवार सुबह वह शिमला आएंगे।

आनंद शर्मा के दौरे को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि वह पार्टी प्रत्याशी हो सकते हैं। हालांकि पार्टी हाईकमान की ओर से अभी तक कोई भी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। उधर, कांग्रेस के भीतर स्थानीय बनाम बाहरी उम्मीदवार को लेकर भी चर्चा जारी है। यदि प्रदेश से बाहर के नेता को उम्मीदवार बनाया गया तो कुछ विधायकों की नाराजगी सामने आने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा रहा है। 

भाजपा फिलहाल कांग्रेस प्रत्याशी की घोषणा का इंतजार कर रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार कांग्रेस उम्मीदवार की पृष्ठभूमि और विधायक दल की स्थिति का आकलन करने के बाद ही भाजपा प्रत्याशी के नाम पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यदि कांग्रेस ने प्रदेश से बाहर का उम्मीदवार उतारा तो भाजपा इस मुद्दे को राजनीतिक तौर पर भुनाने की कोशिश कर सकती है। सत्तारूढ़ दल के भीतर असंतोष की संभावनाओं को देखते हुए चुनाव को रोचक बनाने की रणनीति भी बनाई जा सकती है।

पिछले राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के कारण कांग्रेस को झटका लगा था, इसलिए इस बार पार्टी नेतृत्व कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। कांग्रेस जहां विधायक दल की एकजुटता बनाए रखने में जुटी है, वहीं भाजपा भी परिस्थितियों के अनुसार रणनीतिक दांव खेलने की तैयारी में है।

उधर, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल ने कहा कि राज्यसभा प्रत्याशी तय करना पूरी तरह केंद्रीय नेतृत्व का विषय है। प्रदेश भाजपा संगठन हाईकमान के निर्देशों का पालन करेगा। पार्टी राजनीतिक हालात पर नजर रखे हुए है और उचित समय पर फैसला किया जाएगा।

उम्मीदवार हिमाचल का हो या बाहर का, कांग्रेस के विधायक एकजुट होकर करेंगे मतदान : हर्षवर्धन
हिमाचल प्रदेश में होने जा रहे राज्यसभा चुनाव को लेकर सत्तारूढ़ कांग्रेस ने एकजुटता का दावा किया है। संसदीय कार्यमंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि पार्टी का उम्मीदवार हिमाचल का हो या प्रदेश से बाहर का, कांग्रेस विधायक पूरी मजबूती के साथ उसके पक्ष में मतदान करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार राज्यसभा चुनाव में किसी प्रकार की क्रॉस वोटिंग नहीं होगी और सभी विधायक एकजुट होकर पार्टी प्रत्याशी को जीत दिलाएंगे।

मंगलवार को राज्य सचिवालय में मीडिया से बातचीत में हर्षवर्धन ने कहा कि राज्यसभा प्रत्याशी के नाम पर अंतिम निर्णय हाईकमान करेगा और केंद्रीय नेतृत्व की ओर से प्रत्याशी का नाम बुधवार को घोषित किए जाने की संभावना है। हर्षवर्धन ने कहा कि कांग्रेस विधायक दल पार्टी नेतृत्व के फैसले को सर्वसम्मति से स्वीकार करेगा। राज्यसभा चुनाव के लिए पांच मार्च को नामांकन दाखिल किया जाना है। इससे पहले सुबह 11 बजे विधानसभा परिसर में कांग्रेस विधायक दल की बैठक होगी। बैठक में मुख्यमंत्री सुक्खू की अध्यक्षता में चुनाव रणनीति पर चर्चा की जाएगी।

उन्होंने कहा कि विधायक दल की बैठक का उद्देश्य सभी विधायकों को एक मंच पर लाकर चुनाव प्रक्रिया और मतदान को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश देना है। कांग्रेस ने पिछले राज्यसभा चुनाव से सबक लिया है और इस बार पूरी तैयारी के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी। कहा कि मुख्यमंत्री सुक्खू के नेतृत्व में सरकार मजबूती से काम कर रही है। सभी विधायक चट्टान की तरह मुख्यमंत्री के साथ खड़े हैं।



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