हिमाचल प्रदेश के जेएनजीईसी कॉलेज सुंदरनगर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रशिक्षुओं ने एक अनोखा स्कूटर तैयार किया है। यह स्कूटर न केवल व्यक्ति को आसानी से उठा सकता है, बल्कि इतना हल्का भी है कि उसे आप स्वयं उठाकर कहीं भी ले जा सकते हैं।
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जेएनजीईसी सुंदरनगर के छात्रों ने बनाया किफायती ई-स्कूटर, लागत सिर्फ़ 35 हजार रुपये
बढ़ती ई-मोबिलिटी और महंगे इलेक्ट्रिक वाहनों के बीच जेएनजीईसी कॉलेज सुंदरनगर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रशिक्षुओं ने कम लागत वाला अभिनव स्कूटर तैयार किया है। इस एक-सीटर ई-स्कूटर की कुल लागत मात्र 35 हजार रुपये आई है।
स्कूटर इतना हल्का और टिकाऊ है कि यह जहाँ आपका बोझ उठा सकता है, वहीं जरूरत पड़ने पर आप इसे खुद भी उठाकर आसानी से कहीं भी ले जा सकते हैं। बाजार में इसी श्रेणी के स्कूटरों की कीमत 60 हजार से 2 लाख रुपये तक होती है, ऐसे में यह मॉडल किफायती विकल्प के रूप में उभर रहा है।
कम बजट में टिकाऊ परिवहन समाधान: छात्रों ने तैयार किया हल्का व शक्तिशाली ई-स्कूटर
जेएनजीईसी सुंदरनगर के प्रशिक्षुओं द्वारा तैयार किया गया यह स्कूटर कम बजट में टिकाऊ परिवहन समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नवाचार है। 35 से 45 किलोग्राम वजन वाला यह मॉडल 120 से 150 किलोग्राम तक भार उठाने में सक्षम है।
लिथियम-आयन बैटरी पर आधारित यह स्कूटर एक बार चार्ज होने पर 40 से 60 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है, जबकि इसकी अधिकतम गति 25 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई है।
निर्माण के दौरान छात्रों ने हल्के ढांचे, ऊर्जा दक्षता और सुरक्षा मानकों को प्राथमिकता दी है, जिसके चलते यह ई-स्कूटर दैनिक उपयोग के लिए एक व्यावहारिक और सुलभ विकल्प बनकर उभरता है।
छात्रों ने सीमित संसाधनों में बनाया अभिनव ई-स्कूटर, संस्थान ने नवाचार की सराहना की
जेएनजीईसी सुंदरनगर के प्रशिक्षु जागीर सिंह, अंकुश कुमार, विशाल उपाध्याय, तुल्या जमवाल और चंदन शर्मा ने मिलकर यह प्रोजेक्ट तैयार किया। पूरी टीम को मैकेनिकल विभाग के एचओडी प्रोफेसर डॉ. रितेश कौंडल का मार्गदर्शन मिला। डॉ. कौंडल ने कहा कि छात्रों ने सीमित संसाधनों के बावजूद उत्कृष्ट तकनीकी कौशल प्रदर्शित किया है।
भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के दौर में छात्रों द्वारा विकसित यह ई-स्कूटर नई पीढ़ी की तकनीकी क्षमता और नवाचार को प्रभावी रूप से सामने लाता है। संस्थान के अनुसार इस प्रोटोटाइप को सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। टीम अब इसके प्रदर्शन परीक्षण, सुधार और संभावित व्यावसायिक उपयोग के अवसरों की तलाश कर रही है।
