हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा निर्णय सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी भी विभाग में कनिष्ठ कर्मचारी (Junior Employee) का वेतन उसके वरिष्ठ कर्मचारी (Senior Employee) से अधिक नहीं हो सकता। कोर्ट ने कहा कि यह स्थिति सेवा नियमों, प्रशासनिक न्याय और समानता के सिद्धांत के खिलाफ है। इस फैसले को राज्य के हजारों सरकारी कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण नजीर माना जा रहा है।
मामला तब सामने आया जब एक वरिष्ठ कर्मचारी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। उसने अपनी याचिका में कहा कि समान पद पर कार्यरत उसके कनिष्ठ को वेतन संशोधन और पदोन्नति के चलते उससे अधिक वेतन मिल रहा है। यह स्थिति न केवल अनुचित है, बल्कि वरिष्ठता के सिद्धांत का भी उल्लंघन करती है। याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि विभाग द्वारा कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिसके बाद उसे न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने इस मुद्दे को गंभीर माना और कहा कि वरिष्ठता का सम्मान सरकारी सेवा का मूल तत्व है। न्यायमूर्ति ने अपने आदेश में कहा कि जब कोई व्यक्ति लंबे समय से किसी पद पर कार्यरत है और अनुभव रखता है, तो यह तर्कसंगत नहीं है कि उसी पद पर कार्य करने वाला उसका कनिष्ठ उससे अधिक वेतन पाए। ऐसा होना “असमानता” की श्रेणी में आता है और इससे वरिष्ठ कर्मचारियों के मनोबल पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित विभाग को निर्देश दिया कि सभी विभागों में ऐसी वेतन विसंगतियों की समीक्षा की जाए और जहां भी कनिष्ठ कर्मचारियों का वेतन वरिष्ठों से अधिक पाया जाए, वहां तुरंत सुधार किया जाए। साथ ही, अदालत ने यह भी कहा कि भविष्य में वेतन निर्धारण और प्रमोशन नीति इस तरह बनाई जाए कि ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।
अदालत ने अपने आदेश में यह भी जोड़ा कि किसी कर्मचारी को संशोधित वेतनमान या पदोन्नति का लाभ मिलना गलत नहीं है, लेकिन इसके बाद विभाग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वरिष्ठ कर्मचारियों का वेतनमान भी उसी अनुपात में समायोजित किया जाए।
इस फैसले के बाद राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों में खुशी की लहर है। कर्मचारी संगठनों ने कहा है कि यह फैसला लंबे समय से चली आ रही वेतन असमानताओं को दूर करने में मदद करेगा और वरिष्ठ कर्मचारियों को उनका उचित हक दिलाएगा।
वहीं, सरकारी सूत्रों का कहना है कि विभाग अब सभी कर्मचारियों के वेतन रिकॉर्ड की समीक्षा करेगा और जहां भी विसंगति पाई जाएगी, वहां संशोधन किए जाएंगे। हाईकोर्ट के इस निर्णय को प्रशासनिक पारदर्शिता और सेवा न्याय की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
