नए मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी तैनाती के लिए एक समान नीति लागू
राज्य के सभी नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अब फैकल्टी की तैनाती एक समान नीति के तहत की जाएगी। इस नीति के दायरे में डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज नाहन, नेरचौक, हमीरपुर और चंबा मेडिकल कॉलेज शामिल हैं।
सरकार का उद्देश्य इन संस्थानों में शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी और संतुलित बनाना है, ताकि सभी कॉलेजों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को समान रूप से मजबूत किया जा सके।
चार नए मेडिकल कॉलेजों में कॉमन काडर सिस्टम लागू, फैकल्टी ट्रांसफर की मिलेगी सुविधा
हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के चार नए मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए कॉमन काडर सिस्टम लागू करने का फैसला लिया है। यह व्यवस्था नाहन, नेरचौक, हमीरपुर और चंबा मेडिकल कॉलेज के लिए लागू होगी।
नई व्यवस्था के तहत इन कॉलेजों में कार्यरत प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर अब आपस में ट्रांसफर हो सकेंगे। साथ ही, चिकित्सकों की नई भर्ती भी इसी कॉमन काडर सिस्टम के तहत की जाएगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस काडर के तहत आने वाले चिकित्सकों के तबादले आईजीएमसी, एम्स चमियाना और टांडा मेडिकल कॉलेज में नहीं किए जाएंगे।
मंगलवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की भर्ती, पदोन्नति और सेवा शर्तों में एकरूपता लाने के उद्देश्य से यह कॉमन काडर सिस्टम लागू किया गया है।
नए मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी दूर करने को कॉमन कैडर, दो माह में देना होगा विकल्प
चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग ने प्रदेश के नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी दूर करने और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए कॉमन कैडर सिस्टम लागू करने का निर्णय लिया है।
जारी अधिसूचना के अनुसार, प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों को मिलाकर एक साझा कैडर बनाया गया है। भविष्य में इन कॉलेजों में होने वाली सभी नियुक्तियां और पदोन्नतियां इसी प्रणाली के तहत की जाएंगी।
सरकार ने पहले से कार्यरत फैकल्टी को राहत देते हुए उनके पदोन्नति अधिकार सुरक्षित रखे हैं। मौजूदा स्टाफ अपने-अपने संस्थान के कैडर में ही पदोन्नति प्राप्त करेगा, बशर्ते वहां रिक्तियां उपलब्ध हों।
वहीं, नई भर्ती और पदोन्नति कोटे से आने वाले सभी कर्मियों पर कॉमन कैडर सिस्टम पूरी तरह लागू रहेगा। विशेषज्ञ मेडिकल अधिकारियों को इस संबंध में दो महीने के भीतर अपना विकल्प देना अनिवार्य किया गया है।
मेडिकल फैकल्टी के लिए विकल्प अनिवार्य, कॉमन कैडर में नियुक्ति प्रक्रिया तय
प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों से जुड़ी नई व्यवस्था के तहत विशेषज्ञ चिकित्सकों और मेडिकल ऑफिसर्स को अपने करियर विकल्प का चयन करना अनिवार्य किया गया है। उन्हें यह तय करना होगा कि वे चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर बनना चाहते हैं या स्वास्थ्य सेवा निदेशालय में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर के रूप में कार्य करना चाहते हैं। एक बार दिया गया विकल्प अंतिम और बाध्यकारी होगा।
अधिसूचना के अनुसार, रिक्तियों की गणना के लिए हर वर्ष 1 जनवरी को कट-ऑफ तिथि निर्धारित की गई है। भविष्य में आईजीएमसी शिमला, टांडा और चमियाना की रिक्तियों को भी नए मेडिकल कॉलेजों के साथ जोड़कर भर्ती प्रक्रिया संचालित की जाएगी।
इसके साथ ही, सभी आवेदन केवल उचित माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे और भविष्य की नियुक्तियां हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से की जाएंगी।
मेडिकल ऑफिसर (स्पेशलिस्ट), जिनके पास पीजी डिग्री और तीन वर्ष का शिक्षण अनुभव है, उन्हें असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर पदोन्नति के लिए विकल्प देना होगा। यह विकल्प डायरेक्टोरेट ऑफ मेडिकल एजुकेशन (डीएमई) या डीएचएस कैडर में शामिल होने के लिए होगा, और एक बार चयन करने के बाद इसे अंतिम माना जाएगा।
पदोन्नति के बाद खाली रहने वाले पद सीधी भर्ती से भरेंगे
– प्रदेश सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पदोन्नति प्रक्रिया पूरी होने के बाद जो पद खाली रह जाएंगे, उन्हें ट्रांसफर, डेपुटेशन या सीधी भर्ती के माध्यम से भरा जाएगा। आईजीएमसी शिमला, चमियाना और टांडा मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थानों के मौजूदा फैकल्टी सदस्यों के पदोन्नति अधिकार उनके वर्तमान काडर में सुरक्षित रहेंगे।
