हिमाचल के 100 CBSE स्कूलों में सब-कैडर शिक्षकों की भर्ती, फरवरी 2026 में परीक्षा
मंगलवार को राज्य सचिवालय में आयोजित शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में बड़ा निर्णय लिया गया।
बैठक में तय किया गया कि हिमाचल प्रदेश के 100 सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों का सब-कैडर बनाया जाएगा। इसके लिए फरवरी 2026 में परीक्षा आयोजित की जाएगी।
हिमाचल प्रदेश के 100 सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों का सब-कैडर बनाने के लिए फरवरी 2026 में परीक्षा आयोजित की जाएगी। यह परीक्षा स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला के माध्यम से करवाई जाएगी।
परीक्षा के आधार पर प्रधानाचार्य, शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारियों का चयन किया जाएगा। चयन प्रक्रिया में अकादमिक उत्कृष्टता और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में योगदान को भी महत्वपूर्ण मानदंड के रूप में शामिल किया जाएगा।
मंगलवार को राज्य सचिवालय में आयोजित शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने कहा कि शिक्षकों को प्रोत्साहित करने के लिए मौद्रिक और गैर मौद्रिक दोनों प्रकार की प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन योजना भी आरंभ की जाएगी। राज्य सरकार ने शिक्षा का स्तर बढ़ाने और विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के दृष्टिगत वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश के 65 स्कूलों को सीबीएसई से संबंद्धता मिल गई है। शेष स्कूलों को भी इसी माह के अंत तक संबंद्धता मिल जाएगी। इस संबंध में औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। शिक्षा सचिव ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) में बदलने जा रहे 100 सरकारी स्कूलों के लिए शिक्षकों का अलग सब कैडर बनेगा।
CBSE सब-कैडर में बड़ा बदलाव: शिक्षकों को मिलेगा विकल्प, स्कूलों में प्रतिस्पर्धा और शिक्षा गुणवत्ता सुधार पर सरकार का फोकस
हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में CBSE सब-कैडर प्रणाली को व्यापक रूप से लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मौजूदा शिक्षकों को यह विकल्प दिया जाएगा कि वे चाहें तो नए सीबीएसई सब-कैडर में शामिल हो सकते हैं। सरकार का मानना है कि इससे स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्ध स्कूलों और सीबीएसई से जुड़े स्कूलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिसका सीधा लाभ विद्यार्थियों को मिलेगा।
शिक्षा के साथ व्यापक विकास पर जोर
नई व्यवस्था में सीबीएसई स्कूलों में केवल अकादमिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के कुल व्यक्तित्व विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए कई प्रमुख पहलें शामिल की गई हैं:
- विद्यार्थियों के पोषण और स्वास्थ्य निगरानी
- खेलकूद और आउटडोर गतिविधियों को बढ़ावा
- कला व सांस्कृतिक गतिविधियों को मजबूत करना
- कौशल विकास के लिए विशेष कार्यक्रम
- अतिरिक्त सहायता के लिए सुधारात्मक शिक्षण
- काउंसलिंग, मेंटरिंग और मनोवैज्ञानिक सहायता
- विद्यार्थियों के लिए कॅरिअर मार्गदर्शन और प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग सुविधाएं
सरकार का कहना है कि ये प्रयास बच्चों की समग्र क्षमता को विकसित करने और आधुनिक शिक्षा मॉडल को मजबूत करने में मदद करेंगे।
आवश्यकतानुसार नए पदों का सृजन
इन सभी पहलों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राज्य सरकार आवश्यकता के अनुसार नए पद भी सृजित करेगी, ताकि स्कूलों में स्टाफ की कमी न रहे और कार्यक्रम बिना बाधा के चल सकें।
सीबीएसई स्कूलों की पहचान होगी अलग
राज्य के सीबीएसई स्कूलों को एक विशिष्ट पहचान देने के लिए:
- स्कूल भवनों का रंग अलग निर्धारित किया जाएगा
- विद्यार्थियों की वर्दी का रंग भी अलग रखा जाएगा
इस संबंध में जिला अधिकारियों से सुझाव मांगे गए हैं। अंतिम निर्णय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद लिया जाएगा।
बैठक में अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा
समीक्षा बैठक में केवल सब-कैडर ही नहीं, बल्कि शिक्षा प्रशासन से जुड़ी कई अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी चर्चा की गई, जिनमें शामिल हैं:
- प्रिंसिपलों और हेडमास्टरों की लंबित पदोन्नतियों को शीघ्र पूरा करना
- वार्षिक परीक्षाओं की तैयारी और संचालन से जुड़ी रणनीतियाँ
- शैक्षणिक गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए अतिरिक्त नीतिगत सुझाव
सरकार का कहना है कि सब-कैडर प्रणाली लागू होने के बाद प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता, जवाबदेही और प्रतिस्पर्धा—तीनों में सुधार देखने को मिलेगा।
