हिमाचल: बिजली के झटकों से नहीं टूटे अजय शर्मा, 50 गेंदों में 176 रन ठोककर बनाया रिकॉर्ड

हिमाचल: चंबा के अजय शर्मा ने पैरा क्रिकेट में रचा इतिहास, 50 गेंदों में ठोके 176 रन

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के अजय शर्मा ने दर्द, गरीबी और लंबी संघर्षपूर्ण यात्रा को पीछे छोड़ते हुए इंडिया पैरा क्रिकेट में इतिहास रच दिया। उन्होंने मात्र 50 गेंदों में 176 रन की विस्फोटक पारी खेलकर सभी को हैरान कर दिया।

हिमाचल: बिजली के झटकों से नहीं टूटा हौसला, चंबा के अजय शर्मा ने 50 गेंदों में 176 रन ठोककर बनाया विश्व रिकॉर्ड

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के अजय शर्मा ने यह साबित कर दिया कि सच्चा हौसला किसी भी मुश्किल के आगे नहीं झुकता। जो युवक कभी बिजली के झटकों जैसी दर्दनाक परिस्थितियों से भी नहीं टूटा, उसी अजय शर्मा ने अब अपने बल्ले से रिकॉर्ड तोड़ दिया है।

दर्द, गरीबी और लंबी जद्दोजहद को पीछे छोड़ते हुए अजय ने इंडिया पैरा क्रिकेट में इतिहास रच दिया। आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में आयोजित जोनल क्रिकेट टूर्नामेंट में उन्होंने सेंटर जोन के खिलाफ 15 ओवर के मैच में महज 50 गेंदों में 176 रन की विस्फोटक पारी खेली।

उनकी इस ऐतिहासिक पारी में 19 छक्के और 12 चौके शामिल रहे। खास बात यह रही कि अजय ने सिर्फ 28 गेंदों में अपना शतक पूरा कर लिया। यह प्रदर्शन पैरा क्रिकेट के इतिहास में एक नया विश्व रिकॉर्ड बन गया है।

इससे पहले यह रिकॉर्ड मध्य प्रदेश के ग्वालियर के योगेंद्र भदौरिया के नाम था, जिन्होंने 31 गेंदों में शतक जड़ा था। अजय की इस उपलब्धि ने उन्हें नई पहचान दिलाई है।

हिमाचल प्रदेश दिव्यांग क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलदीप ठाकुर के अनुसार, इस प्रतियोगिता में देश के पांच जोन भाग ले रहे हैं।

चंबा जिले के छोटे से गांव जुम्महार के रहने वाले अजय शर्मा एक साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता चाय की रेहड़ी चलाते हैं। अजय ने अपनी पढ़ाई राजकीय बाल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, चंबा से कॉमर्स संकाय में 12वीं कक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की है।

अजय शर्मा की यह कहानी सिर्फ एक पारी नहीं, बल्कि उस अदम्य हौसले की मिसाल है, जिसने हर मुश्किल के सामने हार मानने से इंकार कर दिया।

हादसे ने बदली जिंदगी

अजय की जिंदगी में बड़ा मोड़ तब आया जब वह अपने पिता की रेहड़ी पर तिरपाल ठीक कर रहे थे। इसी दौरान हाई वोल्टेज बिजली के तारों की चपेट में आ गए और गंभीर रूप से झुलस गए। वह नौ दिन तक कोमा में रहे। उन्हें पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया। वहां आठ ऑपरेशन हुए। इलाज पर 15 लाख से अधिक खर्च आया। इसके लिए परिवार को बैंक से ऋण लेना पड़ा। करीब तीन साल बाद अजय चलने लगे। एक साल तक अवसाद से भी जूझते रहे।

कोच योगराज सिंह का मिला मार्गदर्शन

अजय अपनी सफलता का श्रेय कोच योगराज सिंह को देते हैं। वह पूर्व भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता हैं। उनके मार्गदर्शन में अजय ने अपने खेल को नई दिशा दी। अजय अब तक 15 से अधिक राष्ट्रीय टूर्नामेंट में भाग ले चुके हैं। वह चेन्नई में इंडिया ए टीम का भी हिस्सा रह चुके हैं। उन्होंने सात राष्ट्रीय और एक अंतरराष्ट्रीय पैरा प्रतियोगिता में हिस्सा लिया है। बावजूद इसके अजय को प्रदेश सरकार से कोई विशेष आर्थिक सहायता नहीं मिली है।



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