कांगड़ा के देहरा उपमंडल की ग्राम पंचायत चनौर की राजकीय प्राथमिक पाठशाला में वीरवार दोपहर एक व्यक्ति ने स्कूल में घुसकर मिड-डे मील महिला वर्कर की दराती से हत्या कर दी।
हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा के देहरा उपमंडल की ग्राम पंचायत चनौर की राजकीय प्राथमिक पाठशाला में वीरवार दोपहर एक व्यक्ति ने स्कूल में घुसकर मिड-डे मील महिला वर्कर की दराती से हत्या कर दी। महिला की पहचान सुलोचना देवी (59) निवासी चनौर के रूप में हुई है। आरोपी राकेश कुमार उर्फ मोनू (48) भी चनौर का ही रहने वाला है। पुलिस ने हत्या की प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पैसों के लेनदेन में आरोपी ने इस वारदात को अंजाम दिया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने महिला से पैसे लेने थे।
पूरा दृश्य देख डर मासूमों की आंखों में उतर गया
जानकारी के अनुसार बच्चे खाने के इंतजार में बैठे हुए थे। थालियां सजने वाली थीं। दाल परोसनी बाकी थी। अचानक चीख गूंजी। फर्श पर खून बह रहा था। यह पूरा दृश्य देख डर मासूमों की आंखों में उतर गया। देखते ही देखते चनौर का प्राथमिक स्कूल बच्चों के लिए किसी डरावने सपने में बदल गया। मिड-डे मील के इंतजार में बैठे नौनिहालों ने अपनी आंटी सुलोचना देवी को तेजधार हथियार से कटते देखा। जो स्कूल रोज हंसी से गूंजता था, वहां अब चीखें और सिसकियां सुनाई दे रही थीं। हत्या की खबर आग की तरह गांव में फैली। अभिभावक बदहवास हालत में स्कूल की ओर दौड़े। किसी के हाथ में दुपट्टा था, किसी के पैरों में चप्पल तक नहीं। स्कूल पहुंचते ही उन्होंने बच्चों को सीने से लगा लिया। सुरक्षित देखकर राहत की सांस ली, लेकिन बच्चों की आंखों में उतर चुका खौफ साफ दिख रहा था।
आरोपी मोनू दराती से कर रहा था वार
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब आरोपी मोनू दराती से वार कर रहा था, तब कई बच्चे आंगन में ही खड़े थे। वे दोपहर का भोजन लेने की तैयारी में थे। महिला की चीखें और खून से लथपथ दृश्य ने बच्चों को अंदर तक हिला दिया। अध्यापकों ने तत्परता दिखाते हुए बच्चों को तुरंत कमरों में बंद कर सुरक्षित किया। दरवाजे बंद कर दिए गए। लेकिन खिड़कियों की दरारों से दिखा वह मंजर मासूम दिलों पर गहरा जख्म छोड़ गया। दोपहर के खाने का निवाला गले से नहीं उतरा। स्कूल परिसर में सिर्फ सिसकियां थीं। कई बच्चे देर तक चुप बैठे रहे। कुछ रोते रहे।
बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है ऐसा मंजर
इतनी कम उम्र में हत्या का प्रत्यक्ष दृश्य देखना बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है। शिक्षा विभाग और प्रशासन तत्काल काउंसलिंग और रिकवरी प्लान लागू करे, जिससे बच्चे इस सदमे से उबर सकें। – ढलियारा कॉलेज से सेवानिवृत्त प्रोफेसर कर्ण पठानिया
अब स्कूलों को सुरक्षित घेरे में लेने का समय आ गया है। जब तक शिक्षक और छात्र सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा संभव नहीं। – मंजीत सिंह, प्राथमिक अध्यापक संघ डाडासीबा के अध्यक्ष
सरकार व्यापक सुरक्षा प्रोटोकॉल तैयार करे। ऐसे इंतजाम हों कि कोई भी बाहरी व्यक्ति स्कूल परिसर में प्रवेश करने से पहले दस बार सोचे। – जितेंद्र सिंह, संगठन मंत्री
चनौर की हृदयविदारक घटना ने यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था फिलहाल भगवान भरोसे है। हम सरकार और शिक्षा विभाग से मांग करते हैं कि स्कूलों की सुरक्षा को अब केवल एक प्रशासनिक विषय न मानकर बच्चों के जीवन के अधिकार से जोड़कर देखा जाए। स्कूलों में बच्चों और अध्यापकों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। – कुलदीप सिंह पठानिया, जिलाध्यक्ष प्राथमिक अध्यापक संघ
