डलहौजी नगर परिषद चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज
डलहौजी नगर परिषद के आगामी चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विभिन्न दलों और संभावित उम्मीदवारों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। शहर में चुनावी गतिविधियां बढ़ने लगी हैं और नेताओं द्वारा जनसंपर्क अभियान भी शुरू कर दिए गए हैं।
मतदाताओं को लुभाने के लिए उम्मीदवार अपने-अपने वादों और योजनाओं को लेकर लोगों के बीच पहुंच रहे हैं। वहीं, स्थानीय मुद्दों जैसे विकास कार्य, स्वच्छता, पानी और सड़क सुविधाओं को लेकर चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।
प्रशासन की ओर से भी चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। आने वाले दिनों में नामांकन प्रक्रिया के साथ ही चुनावी माहौल और अधिक सक्रिय होने की संभावना है।
डलहौजी नगर परिषद चुनाव: बैठकों का दौर तेज, महिला अध्यक्ष पद पर सबकी नजर
डलहौजी (चंबा)। पर्यटन नगरी डलहौजी में नगर परिषद चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। संभावित उम्मीदवारों द्वारा बंद कमरों में बैठकों का दौर शुरू हो चुका है और चुनावी रणनीतियां बनाई जा रही हैं।
इस बार नगर परिषद अध्यक्ष का पद महिला (ओपन) वर्ग के लिए आरक्षित होने के कारण इस पद पर सभी की खास नजर है। डलहौजी के नौ वार्डों से चुने गए पार्षद ही अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चयन करेंगे, जिससे समीकरण और भी दिलचस्प हो गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, वार्ड नंबर 3 (जीपीओ) ओपन है, जहां विधायक डीएस ठाकुर के संभावित उम्मीदवारों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। वहीं, पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष मनोज चड्ढा, जो पिछली बार मात्र एक वोट से हार गए थे, इस बार फिर पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरने को तैयार हैं।
वार्ड नंबर 6 कथलग, जहां पिछले चुनाव में महिला अध्यक्ष बनी थीं, इस बार महिला ओपन होने के कारण मुकाबला और भी रोचक हो गया है। कई वार्डों में नए चेहरे सामने आ सकते हैं, जबकि पुराने दावेदार भी अपनी किस्मत आजमाने की तैयारी में हैं। कुछ वार्डों में त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना भी जताई जा रही है।
डलहौजी नगर परिषद चुनाव पर शिमला तक की नजर रहती है, क्योंकि यहीं से विधानसभा चुनाव के लिए माहौल तैयार होता है। संभावित उम्मीदवारों के नामों को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं और वोटर लिस्ट का भी गहन विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि हर वोटर तक पहुंच बनाई जा सके।
पिछले चुनाव में एक वोट के महत्व को देखते हुए इस बार हर वोटर पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही, यह भी जांचा जा रहा है कि उम्मीदवार या उनके परिवार का कोई सदस्य अवैध कब्जे में तो शामिल नहीं है। चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, अवैध कब्जाधारी और उनके परिवार के सदस्य चुनाव लड़ने के पात्र नहीं होंगे, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
