हिमाचल प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरम हो गई है। धर्मशाला से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक सुधीर शर्मा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को लेकर दिया एक विवादित बयान, जिसने पूरे प्रदेश में सियासी हलचल मचा दी है। सुधीर शर्मा ने एक जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री सुक्खू को ‘कार्टून’ कह डाला, जिसके बाद कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने आ गए हैं।
सुधीर शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि “आज हिमाचल में जो हालात हैं, वे किसी से छिपे नहीं हैं। विकास के नाम पर कुछ नहीं हो रहा, सरकार सिर्फ घोषणाओं और प्रचार में व्यस्त है। मुख्यमंत्री सुक्खू केवल फोटो सेशन और मीडिया हेडलाइनों में रहना पसंद करते हैं। जनता के मुद्दों से उनका कोई लेना-देना नहीं। आज वे खुद एक ‘कार्टून’ बन गए हैं, जिनकी सरकार दिशाहीन हो चुकी है।”
इस बयान के बाद कांग्रेस ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस प्रवक्ता और मंत्री स्तर के नेताओं ने कहा कि सुधीर शर्मा का बयान न केवल अमर्यादित है बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ भी है। कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा कि “जब विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं होता, तब वह इस तरह के व्यक्तिगत हमले करने लगता है। बीजेपी नेताओं की यह बौखलाहट बताती है कि उन्हें मुख्यमंत्री सुक्खू की लोकप्रियता और कामकाज से डर लग रहा है।”
कांग्रेस नेताओं ने आगे कहा कि सुक्खू सरकार ने बीते एक साल में हिमाचल के विकास को नई दिशा दी है — चाहे वह ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को बहाल करने का फैसला हो, औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने की नीति हो, या फिर आपदा प्रभावितों की मदद के लिए उठाए गए ठोस कदम। उन्होंने कहा कि जनता मुख्यमंत्री के काम से खुश है और यही बात विपक्ष को असहज कर रही है।
दूसरी ओर, बीजेपी ने अपने विधायक के बयान का बचाव किया है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि सुधीर शर्मा ने जो कहा, वह जनता की भावना को दर्शाता है। “लोग खुद देख रहे हैं कि सरकार हर मोर्चे पर नाकाम रही है। सड़कें टूटी हुई हैं, बेरोज़गारी बढ़ रही है और बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं भी प्रभावित हैं। मुख्यमंत्री सुक्खू सिर्फ बयानबाज़ी कर रहे हैं, इसलिए जनता भी अब सवाल पूछ रही है,” बीजेपी नेताओं का कहना है।
इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी सियासी बहस छिड़ गई है। ट्विटर (X) और फेसबुक पर कांग्रेस और बीजेपी समर्थक आमने-सामने आ गए हैं। कुछ लोग जहां सुधीर शर्मा के बयान को सही ठहरा रहे हैं, वहीं कई यूजर्स ने इसे मुख्यमंत्री पद की गरिमा पर हमला बताया है। कई लोगों ने लिखा कि “विपक्ष को मुद्दों पर बहस करनी चाहिए, व्यक्तिगत टिप्पणियां नहीं करनी चाहिए।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले समय में और गहराएगा। प्रदेश में पहले से ही महंगाई, बेरोज़गारी और आपदा राहत जैसे मुद्दों को लेकर विपक्ष हमलावर है। ऐसे में सुधीर शर्मा का यह बयान सियासी तापमान को और बढ़ा सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री सुक्खू ने इस पूरे मामले पर सीधे तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, पार्टी इसे बीजेपी की हताशा मान रही है। जल्द ही कांग्रेस इस बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी कर सकती है।
फिलहाल हिमाचल की राजनीति में बयानबाज़ी का दौर तेज हो गया है। जनता जहां विकास और राहत योजनाओं की उम्मीद कर रही है, वहीं दोनों प्रमुख दल — कांग्रेस और बीजेपी — एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप के तीर चला रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह विवाद शांत होता है या फिर चुनावी सियासत में नया मोड़ लेता है।
