महागठबंधन में महासंग्राम… बिहार में दिल्ली दोहराएगी कांग्रेस? सीटों पर RJD से अनबन, तेजस्वी की बढ़ी टेंशन!

बिहार की राजनीति में इस वक्त महागठबंधन के भीतर उथल-पुथल मची हुई है। लोकसभा चुनाव 2024 की तर्ज पर अब विधानसभा चुनाव से पहले भी कांग्रेस और आरजेडी के बीच सीट बंटवारे को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस इस बार बिहार में अपनी स्थिति मजबूत करने के मूड में है और दिल्ली में जो हुआ, वैसा ही रुख वह बिहार में भी अपना सकती है।


कांग्रेस चाहती है कि उसे बिहार में सम्मानजनक संख्या में सीटें दी जाएं, लेकिन आरजेडी अपने परंपरागत वोट बैंक और मजबूत जनाधार का हवाला देते हुए ज्यादा सीटों पर दावा ठोक रही है। यही कारण है कि दोनों दलों के बीच बातचीत के कई दौर अब तक बेनतीजा साबित हुए हैं।

तेजस्वी यादव, जो महागठबंधन के मुख्य चेहरे हैं, इस विवाद को सुलझाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं, लेकिन स्थिति फिलहाल आसान नहीं दिख रही। कांग्रेस का कहना है कि पार्टी अब “छोटी बहन” की भूमिका में नहीं रहना चाहती और उसे उतनी सीटें मिलनी चाहिए, जितनी उसके संगठन और जनाधार के हिसाब से जरूरी हैं।

दूसरी ओर, आरजेडी मानने को तैयार नहीं है। पार्टी का तर्क है कि पिछली बार भी कांग्रेस को अपेक्षा से अधिक सीटें दी गई थीं, लेकिन उसका प्रदर्शन निराशाजनक रहा। अब जबकि विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, आरजेडी नहीं चाहती कि कमजोर उम्मीदवारों के चलते गठबंधन की स्थिति डांवाडोल हो जाए।

कांग्रेस हाईकमान ने बिहार इकाई से साफ कहा है कि इस बार दिल्ली जैसा कोई समझौता नहीं होगा, यानी पार्टी अपने दम पर कुछ सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला भी ले सकती है। इससे गठबंधन में दरार की आशंका बढ़ गई है।

तेजस्वी यादव के लिए यह स्थिति बेहद पेचीदा है — एक तरफ गठबंधन की एकता बचाने की चुनौती है, तो दूसरी ओर अपने दल की साख बनाए रखने का दबाव। वह लगातार दिल्ली से संपर्क में हैं और कोशिश कर रहे हैं कि कांग्रेस को किसी तरह साथ रखा जाए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर कांग्रेस और आरजेडी के बीच समझौता नहीं हुआ, तो इसका सीधा फायदा एनडीए को मिल सकता है। भाजपा पहले ही बिहार में महागठबंधन की कमजोरी पर नजर बनाए हुए है और पार्टी इस हालात का राजनीतिक लाभ उठाने की रणनीति पर काम कर रही है।

कुल मिलाकर, बिहार की राजनीति एक बार फिर गर्म हो गई है। महागठबंधन के नेता जहां एकता का दावा कर रहे हैं, वहीं अंदरखाने की लड़ाई तेज होती जा रही है। अब देखना यह है कि तेजस्वी यादव इस “महासंग्राम” को कैसे शांत करते हैं — क्या कांग्रेस को साथ रख पाएंगे या फिर दिल्ली की तरह बिहार में भी गठबंधन की दीवार दरक जाएगी।

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