शोध में खुलासा: हिमाचल में पांच साल में 34 बार रहा रोगों का प्रकोप, दूषित पानी जिम्मेवार

राज्य में संक्रामक रोगों का बढ़ता खतरा: 5 साल में 34 प्रकोप, 3,937 प्रभावित

वर्ष 2021 से 2025 के बीच राज्य में संक्रामक रोगों के 34 प्रकोप दर्ज किए गए हैं। इन प्रकोपों के चलते कुल 3,937 लोग प्रभावित हुए, जबकि दो लोगों की मौत भी हुई है।

यह आंकड़े राज्य में स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता को दर्शाते हैं और समय पर रोकथाम व बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था की आवश्यकता को उजागर करते हैं।

हिमाचल में दूषित पानी से बढ़ा संक्रमण का खतरा, 5 साल में 34 प्रकोप

हिमाचल प्रदेश में पीने के लिए साफ पानी की कमी लोगों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही है। दूषित पानी के कारण लोग संक्रामक रोगों की चपेट में आ रहे हैं। वर्ष 2021 से 2025 के बीच राज्य में संक्रामक रोगों के 34 प्रकोप दर्ज किए गए, जिनमें 3,937 लोग प्रभावित हुए और दो लोगों की मौत हुई।

आईजीएमसी के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञ डॉ. अमित सचदेवा, डॉ. नवदीप कौशल, सचिन कुमार और अंजू सचदेवा द्वारा किए गए शोध में यह खुलासा हुआ है।

अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2024 संक्रामक रोगों के लिहाज से सबसे गंभीर रहा, जिसमें अकेले 17 प्रकोप सामने आए। इसी वर्ष दो मौतें भी दर्ज की गईं, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

यह रिपोर्ट राज्य में स्वच्छ पेयजल और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है।

हिमाचल में दस्त का सबसे ज्यादा प्रकोप, मानसून में बढ़ा संक्रमण का खतरा

हिमाचल प्रदेश में संक्रामक रोगों के मामलों में तीव्र दस्त सबसे अधिक फैलने वाला रोग रहा है। कुल 2,796 मामले दर्ज किए गए, जो कुल मामलों का 71 प्रतिशत हैं। इसके बाद हेपेटाइटिस-ए के 702 मामले (17.8 प्रतिशत) सामने आए, जबकि डेंगू के मामले 9.6 प्रतिशत रहे। पीलिया और एचएफएमडी (हैंड, फुट एंड माउथ डिजीज) के मामले अपेक्षाकृत कम पाए गए।

जिलों की बात करें तो हमीरपुर, सोलन और मंडी सबसे अधिक प्रभावित रहे। मंडी जिले में सबसे ज्यादा 11 प्रकोप दर्ज किए गए, जबकि सोलन में प्रकोपों की संख्या कम होने के बावजूद मामलों की संख्या अधिक रही, जिससे बड़े स्तर के संक्रमण की आशंका जताई जा रही है।

संक्रमण का खतरा मानसून (जून से सितंबर) और पोस्ट-मानसून (अक्टूबर-नवंबर) के दौरान सबसे अधिक रहा। इस अवधि में कुल मामलों के 60 प्रतिशत से अधिक सामने आए, जबकि अक्तूबर और नवंबर में संक्रमण अपने चरम पर पहुंच गया।

विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों में जल स्रोतों का दूषित होना, स्वच्छता की कमी और मौसम में बदलाव इन प्रकोपों के मुख्य कारण हैं।

ग                     मामले       (प्रतिशत)
तीव्र डायरिया        2796           71.0%
हेपेटाइटिस-ए       702            17.8%
डेंगू                     379            9.6%
पीलिया                 38             1.0%
एचएफएमडी         22             0.6%

यह दिए हैं सुझाव

राज्य में निगरानी प्रणाली को और मजबूत किया जाए, स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाए, डेंगू प्रभावित क्षेत्रों में मच्छर नियंत्रण और उच्च जोखिम वाले इलाकों में हेपेटाइटिस-ए टीकाकरण पर भी विचार करने की जरूरत, समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाएं तो भविष्य में ऐसे प्रकोपों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

हिमाचल में 2000 करोड़ का पेयजल प्रोजेक्ट, 19 हजार योजनाओं में होगा फिल्ट्रेशन

हिमाचल प्रदेश में लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य की करीब 19 हजार पेयजल योजनाओं में फिल्ट्रेशन सिस्टम लगाया जाएगा। इस दिशा में जल शक्ति विभाग द्वारा 2000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है।

जल शक्ति विभाग के ईएनसी (प्रोजेक्ट) धर्मेंद्र गिल के अनुसार, इस प्रोजेक्ट को मई महीने से प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि स्वीकृति के बाद धनराशि जारी हो सके और योजनाओं में फिल्ट्रेशन का कार्य शुरू किया जा सके।

इस पहल से प्रदेश में साफ पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और जलजनित बीमारियों पर भी नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी।

हिमाचल में जलजनित रोगों को लेकर अलर्ट, अस्पतालों को दवाओं का स्टॉक रखने के निर्देश

हिमाचल प्रदेश में बढ़ते जलजनित रोगों के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। अस्पताल प्रशासन को आवश्यक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके।

स्वास्थ्य विभाग लोगों को एहतियात बरतने की सलाह भी दे रहा है। नागरिकों को घरों में पानी उबालकर पीने के लिए कहा जा रहा है, जिससे संक्रमण के खतरे को कम किया जा सके।

निदेशक स्वास्थ्य विभाग गोपाल बैरी के अनुसार, विभाग के अधिकारी और कर्मचारी गांव-गांव जाकर लोगों को जलजनित रोगों के प्रति जागरूक कर रहे हैं, ताकि समय रहते बचाव संभव हो सके।

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