ऊना: नशे के बढ़ते खतरे पर मंथन, चिट्टा प्रचलन रोकने के लिए तलाशे समाधान
ऊना: राजकीय महाविद्यालय ऊना में नशा निवारण समिति की मासिक बैठक प्राचार्य डॉ. मीता शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही नशे की समस्या, विशेषकर चिट्टा (स्मैक) के बढ़ते दुरुपयोग पर गंभीरता से विचार-विमर्श करना और इसके प्रभावी समाधान तलाशना रहा।
ऊना: चिट्टा के बढ़ते प्रचलन पर चिंता, समाधान के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर
बैठक में राजस्व विभाग के अधिकारियों, नगर परिषद के प्रतिनिधियों और महाविद्यालय के शिक्षकों ने भाग लेते हुए अपने-अपने सुझाव प्रस्तुत किए। इस दौरान प्रतिभागियों ने चिंता जताई कि चिट्टा का प्रचलन लगातार बढ़ रहा है, जो युवाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर गंभीर असर डाल रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस समस्या को केवल कानून व्यवस्था के जरिए नियंत्रित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके समाधान के लिए समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है।
सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर
बैठक में सभी उपस्थित सदस्यों ने नशे की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने माना कि इस चुनौती का सामना मिलकर ही किया जा सकता है।
शिक्षण संस्थानों की अहम भूमिका
प्राचार्य डॉ. मीता शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षण संस्थान नशा मुक्ति अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों के बीच जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने, परामर्श सेवाओं को मजबूत बनाने और अभिभावकों की सहभागिता बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित कर नशे की प्रवृत्ति को काफी हद तक रोका जा सकता है।
प्रशासनिक सख्ती और जागरूकता
राजस्व विभाग और नगर परिषद के अधिकारियों ने अपने स्तर पर निगरानी बढ़ाने, अवैध गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाने और स्थानीय स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर बल दिया।
डिजिटल माध्यमों का उपयोग
बैठक में यह सुझाव भी दिया गया कि बस अड्डे पर लगी डिजिटल स्क्रीन का उपयोग नशा विरोधी संदेशों के प्रचार-प्रसार के लिए किया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक यह संदेश प्रभावी ढंग से पहुंच सके।
