पंचायत चुनाव प्रक्रिया में बड़ा बदलाव, संशोधित नियम 2026 अधिसूचित
हिमाचल प्रदेश सरकार ने पंचायत चुनाव प्रक्रिया में अहम बदलाव करते हुए हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (चुनाव) संशोधन नियम 2026 को अधिसूचित कर दिया है। पंचायती राज विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार अब वे सीटें और पद, जो लगातार दो कार्यकाल तक आरक्षित रहे हैं, अगले कार्यकाल में अनारक्षित (सामान्य) माने जाएंगे। हालांकि, विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी सीट या पद को अनारक्षित करने से आरक्षण का निर्धारित प्रतिशत पूरा नहीं होता, तो ऐसी स्थिति में यह प्रावधान लागू नहीं होगा और आरक्षण यथावत रखा जाएगा।
इन पदों पर लागू होगा नियम
यह अधिसूचना सचिव पंचायती राज ने जारी की है। यह निर्णय 13 मार्च 2026 को जारी प्रारूप अधिसूचना पर निर्धारित समय सीमा के भीतर कोई आपत्ति या सुझाव प्राप्त नहीं होने के बाद लिया गया है। संशोधित प्रावधानों के तहत यह नियम पंचायत सदस्य, ग्राम पंचायत प्रधान, पंचायत समिति अध्यक्ष और जिला परिषद अध्यक्ष के पदों पर लागू होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले से पंचायत चुनावों में आरक्षण का रोटेशन अधिक संतुलित होगा। लंबे समय तक एक ही सीट के आरक्षित रहने की स्थिति समाप्त होगी। इससे विभिन्न वर्गों को प्रतिनिधित्व का बेहतर अवसर मिल सकेगा।
27 तक रोस्टर, 31 मार्च को राज्य निर्वाचन आयोग को सौंपे जाएंगे दस्तावेज
प्रदेश सरकार ने 27 मार्च तक आरक्षण रोस्टर तय करने को कहा है। हालांकि, पहले यह तिथि 25 मार्च निर्धारित थी। विधानसभा के चलते तिथि को आगे बढ़ाया गया है। 31 मार्च को पंचायतीराज विभाग चुनाव के संबंधित दस्तावेज राज्य निर्वाचन आयोग को सौंपेगा। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव की तिथि घोषित की जानी है। राज्य में नगर पंचायत व नगर परिषदों के अध्यक्ष और उपाध्यक्षों के चुनाव सीधे नहीं होंगे। कैबिनेट में इस प्रस्ताव पर सहमति नहीं बनी है। कई मंत्रियों ने सीधे चुनाव को सही नहीं माना। पार्षद ही अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को चुनेंगे।
नगर निगम शिमला के मेयर के कार्यालय को बढ़ाने के मामले में 7 अप्रैल को होगी सुनवाई
उधर, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में नगर निगम शिमला के मेयर के कार्यकाल को बढ़ाने को लेकर दायर याचिका पर अब 7 अप्रैल को सुनवाई होगी। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर एक संशोधन आवेदन दायर किया गया है, लेकिन कुछ आपत्तियों के चलते रिकॉर्ड पर नहीं आ पाया, जिसकी वजह से मामले को दो सप्ताह के बाद रखा गया है। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावलिया और न्यायाधीश जियालाल भारद्वाज के खंडपीठ कर रही है। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि मेयर के कार्यकाल को ढाई से पांच वर्ष बढ़ाने को लेकर जो बिल राज्य सरकार ने गवर्नर की मंजूरी के लिए भेजा है, उस पर राज्यपाल ने अपनी सहमति दे दी है। इसके साथ ही राजपत्र में भी प्रकाशित किया गया है।
