हिमाचल हाईकोर्ट: छात्रों की कमी से संस्थान बंद होना धोखाधड़ी नहीं
हिमाचल प्रदेश। प्रदेश हाईकोर्ट ने एक धोखाधड़ी मामले में आरोपी को बरी करते हुए कहा कि यदि कोई शिक्षण संस्थान छात्रों की कमी के कारण बंद हो जाता है, तो इसे धोखाधड़ी के रूप में नहीं माना जा सकता। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि संस्थान के बंद होने का निर्णय आर्थिक या प्रशासनिक कारणों से हो सकता है और इसे आपराधिक मामले से जोड़ना उचित नहीं है।
हिमाचल हाईकोर्ट: छात्रों की कमी से संस्थान बंद होना धोखाधड़ी नहीं, सरकार की अपील खारिज
हिमाचल प्रदेश। हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी के मामले में आरोपी को बरी करते हुए कहा कि यदि कोई शिक्षण संस्थान छात्रों की कमी के कारण बंद हो जाता है, तो इसे धोखाधड़ी नहीं माना जा सकता। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने राज्य सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी गई थी।
अदालत ने साक्ष्यों का विश्लेषण करते हुए पाया कि मामले में आपराधिक नीयत का अभाव था। आईपीसी की धारा 420 के तहत बेईमानी की नीयत होना अनिवार्य है। इस मामले में आरोपी ने बिल्डिंग किराए पर ली, स्टाफ रखा और बस सुविधा भी उपलब्ध कराई थी, जिससे अदालत ने यह स्पष्ट किया कि संस्थान बंद होना केवल प्रशासनिक और आर्थिक कारणों से हुआ।
हिमाचल हाईकोर्ट: गवाहों के बयानों से साबित नहीं हुआ धोखाधड़ी, आरोपी बरी
हिमाचल प्रदेश। हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी मामले में आरोपी को बरी करते हुए कहा कि केवल संस्थान बंद होने से यह साबित नहीं होता कि आरोपी ने छात्रों को ठगने के उद्देश्य से इसे खोला था। मामले के मुख्य गवाह और शिकायतकर्ता अपने बयानों से मुकर गए। शिकायतकर्ता ने अदालत में स्वीकार किया कि उसने संस्थान अपनी मर्जी से छोड़ा था और पुलिस ने उसके हस्ताक्षर खाली कागजों पर लिए थे।
साक्ष्यों से यह भी स्पष्ट हुआ कि अधिकांश छात्रों का चयन भारतीय सेना में हो गया था, जिस कारण उन्होंने पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। छात्रों की कमी के कारण आरोपी को संस्थान बंद करने पर मजबूर होना पड़ा। कई छात्रों ने यह भी माना कि उन्होंने पूरी फीस जमा नहीं की थी और खुद ही संस्थान छोड़ दिया।
हाईकोर्ट ने प्रथम अपीलीय अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ दोष साबित करने में विफल रहा। अदालत ने आरोपी के बेल बॉन्ड रद्द करते हुए उसे सभी आरोपों से मुक्त कर दिया।
बिलासपुर: तकनीकी संस्थान बंद मामले में हाईकोर्ट ने आरोपी को बरी किया
बिलासपुर। यह मामला घुमारवीं क्षेत्र का है, जहां आरोपी पर वर्ष 1998 में एक तकनीकी संस्थान खोलने और छात्रों से भारी फीस वसूलने का आरोप था। आरोप था कि संस्थान ने कुछ समय बाद कोर्स पूरा किए बिना और डिप्लोमा दिए बिना ही बंद कर दिया।
ट्रायल कोर्ट ने 2008 में आरोपी को दोषी ठहराते हुए दो साल का कारावास सुनाया था। हालांकि, 2011 में प्रथम अपीलीय अदालत ने इस फैसले को पलटते हुए आरोपी को बरी कर दिया था। इसके खिलाफ प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट में अपील की थी, जिसे हाल ही में खारिज कर दिया गया।
इग्नू निदेशक और संजौली कॉलेज प्रिंसिपल को हाईकोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश
हिमाचल प्रदेश। प्रदेश हाईकोर्ट ने 1 दिसंबर 2025 के आदेशों की अवहेलना करने पर इग्नू के निदेशक जोगिंदर यादव और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, संजौली कॉलेज के प्रिंसिपल को सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए हैं। यह कड़ा रुख अदालत ने अवमानना याचिका मदन शांडिल बनाम जोगिंदर यादव मामले में अपनाया है। न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की अदालत मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को करेगी।
अदालत ने पहले आदेशों में कहा था कि याचिकाकर्ता मदन शांडिल पिछली चयन प्रक्रिया में वरिष्ठता के आधार पर दूसरे स्थान पर थे। चयन प्रक्रिया को चुनौती देने के बाद अदालत ने पहले स्थान पर रहे उम्मीदवार को अयोग्य घोषित कर याचिकाकर्ता को पद के लिए हकदार पाया। इसके बावजूद प्रतिवादियों ने अदालत के आदेशों को दरकिनार करते हुए नई विज्ञापन प्रक्रिया शुरू कर दी।
प्रतिवादियों का तर्क था कि याचिकाकर्ता ने नए विज्ञापन (दिसंबर 2024) में भाग लेकर पुरानी प्रक्रिया को चुनौती देने का हक खो दिया, जिसे अदालत ने उनके द्वारा अपनी गलती छिपाने का प्रयास माना।
