स्वां नदी में सीधे तौर पर फैक्ट्री का गंदा पानी हो रहा समाहित
खुले में गंदा पानी बहाने से क्षेत्र में वातावरण दूषित
प्रशासन, प्रदूषण बोर्ड और उद्योग विभाग कार्रवाई के नाम पर मौन
एनजीटी में शिकायत के बावजूद भी क्षेत्र में नहीं सुधरे हालात
नौ जनवरी को होगी उद्योगों संचालकों की अनियमितताओं पर सुनवाई
जसवीर ठाकुर
पंडोगा (ऊना)। उपमुख्यमंत्री के गृह विधानसभा क्षेत्र के पंडोगा औद्योगिक क्षेत्र में शराब फैक्ट्री से निकलने वाला गंदा पानी खुले में बहाने का क्रम जारी है। इस पानी का सीधा असर स्वां नदी पर पड़ रहा है, जिससे नदी का पानी दूषित हो रहा है और क्षेत्र का वातावरण भी खराब हो गया है।
स्थानीय प्रशासन, प्रदूषण बोर्ड और उद्योग विभाग इस मामले में कार्रवाई के नाम पर मौन हैं। एनजीटी में शिकायत के बावजूद औद्योगिक क्षेत्र में हालात नहीं सुधरे हैं। मामले की अगली सुनवाई नौ जनवरी 2026 को निर्धारित की गई है, जिसमें उद्योग संचालकों की ओर से बरती जा रही अनियमितताओं पर फैसला सुनाया जाएगा।
क्षेत्र का दौरा करने पर देखा गया कि सुबह के समय भी पंडोगा फैक्ट्री से गंदा पानी खुले में बह रहा है, जो आगे चलकर स्वां नदी में समाहित हो रहा है। स्थानीय प्रशासन और आला अधिकारियों को इस मामले की पूरी जानकारी है, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई होती नजर नहीं आ रही है। परिणामस्वरूप स्थानीय जनता बदबूदार वातावरण में जीवन यापन करने को मजबूर है।
औद्योगिक क्षेत्र में नियमों का पालन भी नहीं हो रहा है। न तो पौधरोपण हुआ है और न ही ग्रीन बेल्ट का निर्माण किया गया है। इसके बावजूद उद्योग संचालक नियमों की अनदेखी कर उद्योग चला रहे हैं। खुफिया विभाग के अधिकारी मनोज कुमार कौशल का कहना है कि उद्योग संचालक प्रशासन, प्रदूषण बोर्ड और उद्योग विभाग को गुमराह कर रहे हैं, जिससे आला अधिकारियों को गलत फीडबैक जा रहा है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
ग्राम पंचायत पंडोगा के प्रधान गुलविंद्र सिंह ने कहा कि शराब फैक्ट्री का गंदा पानी आसपास के खेतों और आबादी को सीधे प्रभावित कर रहा है। उन्होंने संबंधित विभागों और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
ग्राम पंचायत समिति वार्ड 10 के सदस्य रवि दत्त का कहना है कि खुले में फेंके जा रहे गंदे पानी से स्थानीय दुकानदार और ढाबा कारोबारियों को भी नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि उद्योग स्थापित करना ठीक है, लेकिन नियमों का पालन अनिवार्य है। प्रशासन की ढील और प्रदूषण बोर्ड तथा उद्योग विभाग की मिलीभगत से यह समस्या गैरकानूनी तरीके से बढ़ रही है।
