हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा- दुष्कर्म-यौन शोषण मामले में समझौता अस्वीकार, ऐसा करना आरोपी को इनाम देने जैसा

दुष्कर्म और यौन शोषण केस में आरोपी की याचिका खारिज, सौहार्दपूर्ण समझौते के आधार पर FIR रद्द करने से हाईकोर्ट का इनकार

दुष्कर्म और यौन शोषण के मामले में आरोपित ने शिकायतकर्ता के साथ कथित सौहार्दपूर्ण समझौते का हवाला देते हुए एफआईआर रद्द करने की याचिका हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में दायर की थी।
हालांकि, हाईकोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे गंभीर अपराधों में समझौते के आधार पर FIR रद्द नहीं की जा सकती।

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने दुष्कर्म और यौन शोषण के मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की याचिका को खारिज कर दिया है। यह याचिका आरोपी ने शिकायतकर्ता के साथ कथित सौहार्दपूर्ण समझौते के आधार पर दायर की थी। न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की अदालत ने मामले की गंभीरता और समझौते की अस्पष्ट शर्तों को देखते हुए इसे कानून के शासन के विपरीत माना। न्यायालय ने कहा कि यदि ऐसे समझौतों को स्वीकार कर लिया जाता है, जिनमें नियम और शर्तें स्पष्ट नहीं हैं, तो यह आरोपी को उसके कथित कानून उल्लंघन के लिए इनाम देने जैसा होगा, जो कानून के शासन के विपरीत है।

याचिकाकर्ता आरोपी के खिलाफ शिकायतकर्ता ने 24 जुलाई 2023 को पुलिस थाना शाहपुर में आईपीसी की धारा 377, 354-सी, 506 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67, 67-ए के अलावा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(डब्ल्यू)(1)(2) के तहत दायर की थी। आरोपी ने अदालत में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 528 (पूर्व की सीआरपीसी धारा 482) के तहत एफआईआर और परिणामी कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी। याचिका में शिकायतकर्ता (पीड़िता) ने कथित तौर पर याचिकाकर्ता के साथ समझौता कर लिया है।

शादी का झांसा देकर यौन शोषण: हाईकोर्ट ने FIR रद्द करने से किया इनकार, गंभीर अपराधों में समझौते को नहीं माना आधार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने दुष्कर्म मामले में आरोपी द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने शिकायतकर्ता के साथ हुए कथित सौहार्दपूर्ण समझौते का हवाला देते हुए FIR रद्द करने की मांग की थी।

पीड़िता के आरोप: झूठी जानकारी, ब्लैकमेल और दो साल तक यौन शोषण

राज्य सरकार की ओर से दायर स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि—

  • आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसका यौन शोषण किया।
  • उसने अपना गलत नाम और पता बताया तथा खुद को अविवाहित बताया।
  • पीड़िता की तस्वीरें और वीडियो बनाकर बाद में उन्हें ब्लैकmail का हथियार बनाया।
  • आरोपी ने तस्वीरें और वीडियो वायरल करने की धमकी दी और लगभग दो वर्षों तक यौन शोषण करता रहा।

हाईकोर्ट: दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराधों में समझौते से FIR रद्द नहीं हो सकती

हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के 2014 और 2019 के महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला दिया। इन फैसलों में स्पष्ट किया गया है कि:

  • जघन्य और गंभीर अपराध—जैसे हत्या, दुष्कर्म और डकैती—में FIR रद्द करने का आधार पक्षों के बीच समझौता नहीं हो सकता।
  • अदालतों को ऐसे मामलों में BNNS की धारा 528 के तहत शक्ति का इस्तेमाल सावधानीपूर्वक करना चाहिए।

समझौते की सत्यता पर संदेह

न्यायालय ने आरोपी और शिकायतकर्ता के बीच हुए कथित समझौते की प्रामाणिकता पर भी संदेह व्यक्त किया और कहा कि दुष्कर्म का अपराध गंभीर श्रेणी में आता है, इसलिए इस तरह के मामलों में FIR रद्द करना न्याय के सिद्धांतों के विपरीत होगा।

गंभीर आरोपों पर समझौते का हवाला अस्वीकार, हाईकोर्ट ने FIR रद्द करने की याचिका खारिज की

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा पहले लगाए गए गंभीर आरोपों को देखते हुए यह स्वीकार नहीं किया जा सकता कि अब मामला केवल इस आधार पर ख़त्म कर दिया जाए कि दोनों पक्षों ने इसे सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझा लिया है।

अदालत ने माना कि ऐसे मामलों में आरोपों की प्रकृति और गंभीरता को अनदेखा नहीं किया जा सकता।
इन्हीं तथ्यों पर विचार करते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ता की एफआईआर रद्द करने की याचिका खारिज कर दी।

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