हिमाचल विधानसभा शीत सत्र: पहले दिन सदन और बाहर आक्रामक रहा सत्ता पक्ष

शीत सत्रों में हमेशा आक्रामक रहा भाजपा विधायक दल, जयराम ठाकुर के नेतृत्व में विपक्ष का हर बार हमलावर रुख

पिछले वर्षों के सभी शीत सत्रों में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के नेतृत्व में भाजपा विधायक दल लगातार आक्रामक रुख अपनाता रहा है। हर सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश में हमलावर रुख में नजर आया है। भाजपा का आरोप रहता है कि सरकार कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाबदेही से बचती रही है, जिसके चलते विपक्ष मजबूरी में सदन के भीतर और बाहर आक्रामक रणनीति अपनाता है।

 तपोवन धर्मशाला में चल रहे शीत सत्र के पहले दिन विपक्ष पर सत्ता पक्ष ज्यादा आक्रामक दिखा। सत्तारूढ़ दल कांग्रेस की यह व्यूह रचना सदन के भीतर और विधानसभा परिसर में दोनों जगह नजर आई। पिछले वर्षों के सभी शीत सत्रों में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के नेतृत्व का भाजपा विधायक दल हर बार शुरू से ही हमलावर रुख में रह चुका है। बुधवार को भी विपक्षी दल भाजपा ने कांग्रेस को घेरने की पूरी तैयारी कर ली थी। वहीं विपक्ष की रणनीति पर सत्तापक्ष ने कूटनीतिक चाल चली। जहां भाजपा विधायक दल ने सारा काम रोककर सदन में पंचायतों के चुनाव में देरी का मुद्दा उठाते हुए इस एकमात्र विषय पर चर्चा मांगी।

वहीं मुख्यमंत्री सुक्खू ने विपक्ष की बात एकदम से मानकर जैसे पलटकर चुनौती दे डाली। प्रतिपक्ष जहां इस मुद्दे पर प्रश्नकाल से पहले गतिरोध पैदा कर बड़ा हंगामा करने की तैयारी में था, वहीं यह शाम पांच बजे तक पूरी चर्चा में शामिल हुआ। सत्तारूढ़ दल ने विपक्ष पर दूसरा प्रहार भोजनावकाश के दौरान विधानसभा परिसर में नारी सम्मान में प्रदर्शन करते हुए किया। इसमें कांग्रेस के निशाने पर यौन शोषण मामलों में फंसे भाजपा नेता रहे। सत्ता पक्ष के विधायक भाजपा के खिलाफ यहां प्रदर्शन करते हुए चुनौती देते रहे कि प्रतिपक्ष के मुंह पर ताला क्यों लगा है।

फूंक-फूंककर कदम रख रहे भाजपा विधायक दल की गोपनीय मंत्रणा जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में सत्र शुरू होने से महज डेढ़ घंटे पहले हुई। कांग्रेस विधायक दल की बैठक मुख्यमंत्री सुक्खू की अध्यक्षता में एक दिन पहले ही हो चुकी थी। आठ दिन तक प्रस्तावित तपोवन के इस सबसे बड़े सत्र में दिवंगत पूर्व विधायक बाबूराम गौतम का शोकोद्गार जैसे ही 11 बजकर 40 मिनट पर खत्म हुआ। शोकोद्गार के बाद प्रश्नकाल के लिए केवल 20 मिनट ही शेष रह गए थे। विपक्ष ने सारा काम रोककर केवल एक ही पंचायत चुनाव के मुद्दे नियम 67 की चर्चा मांगी। यह प्रस्ताव सदन की कार्यवाही से ठीक पहले स्पीकर को दिया गया, जिसे सीएम सुक्खू ने तुरंत मंजूर कर लिया।

सदन में सत्र शुरू होते पढ़ी संविधान की प्रस्तावना
विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही बुधवार को सदन में संविधान की प्रस्तावना पढ़ी गई। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि बुधवार को संविधान दिवस है। उन्होंने आसन से संविधान की प्रस्तावना को पढ़ा, जिसे सदन में मौजूद सभी सदस्यों ने दोहराया।

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