कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में नियमित कुलपति की नियुक्ति लटकी, कर्मचारियों-छात्रों में बढ़ रहा रोष
पालमपुर (कांगड़ा)। कार्यवाहक कुलपति के सहारे चल रहे कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर को अब तक नियमित कुलपति नहीं मिल पाया है।
लंबे समय से नियुक्ति न होने पर अब विश्वविद्यालय के अंदर कर्मचारी, छात्र और शिक्षक खुलकर नाराज़गी जताने लगे हैं। नियमित कुलपति न होने से कई प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
हालांकि कुलपति नियुक्ति का मामला हाईकोर्ट में लंबित है, लेकिन इसका सबसे बड़ा कारण राजभवन और राज्य सरकार के बीच टकराव माना जा रहा है। इसी को लेकर विश्वविद्यालय में यह सवाल उठने लगा है कि आखिर नियुक्ति में इतनी देरी क्यों की जा रही है।
विश्वविद्यालय की एबीवीपी इकाई ने भी पालमपुर पहुंचे मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के समक्ष यह मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया और जल्द नियुक्ति की मांग रखी।
गौरतलब है कि 22 जुलाई 2023 को नियमित कुलपति का पद खाली हुआ था और आज तक नया कुलपति नियुक्त नहीं किया जा सका है। इससे विश्वविद्यालय में अनिश्चितता और असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
नियमित कुलपति की कमी से कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर की NIRF रैंकिंग गिरी, शोध और शिक्षा पर असर
नियमित कुलपति न होने का असर अब कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर की प्रतिष्ठा पर साफ दिखाई देने लगा है। विश्वविद्यालय की नेशनल इंस्टीट्यूट रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) रैंकिंग गिरकर 29वें स्थान पर पहुंच गई है।
कारण यह बताया जा रहा है कि लंबे समय से कुलपति की नियुक्ति न होने के चलते शिक्षा, शोध और प्रसार गतिविधियों में उल्लेखनीय कमी आई है।
कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में देश–विदेश से छात्र पढ़ाई और शोध के लिए आते हैं, लेकिन कई महत्वपूर्ण रिसर्च प्रोजेक्ट रुके हुए हैं, जिससे छात्रों के भविष्य पर सीधा असर पड़ रहा है।
इसी स्थिति को देखते हुए विश्वविद्यालय की एबीवीपी इकाई ने मुख्यमंत्री के सामने यह मुद्दा उठाते हुए जल्द से जल्द नियमित कुलपति नियुक्त करने की मांग दोहराई है।
विश्वविद्यालय में नियमित कुलपति न होने से हर कोई परेशान है। बार-बार कार्यवाहक कुलपति की नियुक्ति होने से कई कामों में बाधा आ रही है। इससे कर्मचारी, शिक्षक व छात्र परेशान हैं। विश्वविद्यालय में कई शिक्षकों और कर्मचारियों पद खाली है। विश्वविद्यालय में जल्द नियमित कुलपति का पद भरा जाना चाहिए।
-नरेश शर्मा, महासचिव, गैर शिक्षक कर्मचारी संघ विवि
कृषि विश्वविद्यालय में जो कुलपति आ रहा है, वह साल या आठ महीने के लिए आ रहा है। जब तक वह कोई प्लान करता है, तब तक वह सेवानिवृत्त हो जाता है। इससे शिक्षा, शोध और प्रसार कार्य प्रभावित हो रहे है। यही कारण है कि विश्वविद्यालय की रैंकिंग भी लगातार गिर रही है। जब तक नियमित कुलपति नहीं आता, तब तक विश्वविद्यालय की रैकिंग कहां पहुंचेगी, इसका कोई पता नहीं।
-डॉ.जनार्दन सिंह, महासचिव, हपौटा कृषि विवि पालमपुर
