बरसात खत्म होते ही हिमाचल में 25 फीसदी तक घट गया बिजली उत्पादन, सूबे में बढ़ी डिमांड

हिमाचल प्रदेश में मानसून के समापन के साथ ही जल विद्युत परियोजनाओं से होने वाला बिजली उत्पादन लगभग 25 फीसदी तक घट गया है। राज्य की नदियों और झीलों में पानी का स्तर कम होने से पावर हाउसों की टरबाइनें पूरी क्षमता से नहीं चल पा रही हैं, जिसके कारण बिजली उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

प्रदेश में बरसात के दौरान नदियों और झरनों में जल प्रवाह अधिक होता है, जिससे बिजली उत्पादन चरम पर रहता है। लेकिन अब जलस्तर घटने से परियोजनाओं में बिजली उत्पादन सीमित हो गया है। इससे राज्य की बिजली जरूरतों को पूरा करने में मुश्किलें बढ़ने लगी हैं।

ऊर्जा विभाग के अनुसार, इस समय प्रदेश में घरेलू और औद्योगिक बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। सर्दियों की शुरुआत के साथ ही हीटिंग उपकरणों के उपयोग में वृद्धि हो रही है, जबकि उद्योगों में भी बिजली की खपत सामान्य दिनों की तुलना में अधिक है। ऐसे में उत्पादन और मांग के बीच अंतर पैदा हो गया है।

अधिकारियों ने बताया कि उत्पादन में आई इस कमी को पूरा करने के लिए राज्य सरकार को बाहरी राज्यों से बिजली खरीदनी पड़ रही है। हालांकि, यह बिजली बाजार दरों पर मिलने से सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार बढ़ रहा है। इससे प्रदेश के बिजली बोर्ड की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में जब तापमान और गिरेगा, तो नदियों में पानी का बहाव और घटेगा। ऐसे में जल विद्युत परियोजनाओं का उत्पादन और कम हो सकता है। सरकार ने स्थिति पर नजर रखते हुए विभागीय अधिकारियों को ऊर्जा आपूर्ति सुचारू रखने के निर्देश दिए हैं।

साथ ही, आम जनता से भी अपील की गई है कि वे ऊर्जा का संयमित उपयोग करें और अनावश्यक बिजली की बर्बादी से बचें। ऊर्जा विभाग ने कहा है कि यदि जरूरत पड़ी तो चरणबद्ध तरीके से बिजली आपूर्ति का प्रबंधन भी किया जा सकता है ताकि प्रदेश में कोई बड़ा संकट न उत्पन्न हो।

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