हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) अब अपनी बसों में पार्सल और अन्य सामान भेजने पर लगने वाले किराये में कमी करने जा रहा है। निगम इस दिशा में व्यापक नीति परिवर्तन की तैयारी में है ताकि लोगों को सस्ती और सुलभ पार्सल सेवा प्रदान की जा सके। जानकारी के अनुसार, निगम ने मौजूदा पार्सल पॉलिसी में संशोधन का मसौदा तैयार कर लिया है, जिसे जल्द ही परिवहन विभाग की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
वर्तमान में एचआरटीसी बसों में सामान भेजने पर जो दरें लागू हैं, उन्हें लेकर लंबे समय से जनता और कारोबारियों के बीच असंतोष देखा जा रहा था। कई व्यापारियों का कहना था कि निजी ट्रांसपोर्ट एजेंसियों की तुलना में एचआरटीसी का भाड़ा ज्यादा है, जिस कारण लोग बसों के माध्यम से सामान भेजने से बचते हैं। अब सरकार और निगम दोनों इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए दरों में कमी की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
निगम के अधिकारियों के अनुसार, नई नीति में किराया निर्धारण का तरीका पूरी तरह बदला जाएगा। अब किराया सामान के वजन, दूरी और प्रकृति के आधार पर तय किया जाएगा। पहले सभी तरह के सामान पर लगभग समान दरें लागू होती थीं, जिसके कारण छोटे या हल्के पार्सल भेजने वालों को भी अधिक भुगतान करना पड़ता था। प्रस्तावित संशोधन के बाद यह असमानता दूर होगी और किराये में 10 से 30 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।
एचआरटीसी का मानना है कि इस कदम से न केवल आम जनता को राहत मिलेगी बल्कि निगम की आय में भी बढ़ोतरी होगी। दरअसल, किराया घटने के बाद लोग एचआरटीसी की बसों के माध्यम से अधिक संख्या में पार्सल भेजने लगेंगे। इससे निगम की पार्सल सेवा को नया प्रोत्साहन मिलेगा और बसों में खाली स्थानों का उपयोग बेहतर तरीके से किया जा सकेगा।
अधिकारियों के अनुसार, यह संशोधन नीति के साथ-साथ सेवा की गुणवत्ता में सुधार पर भी केंद्रित होगा। एचआरटीसी जल्द ही पार्सल बुकिंग के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू करने की योजना बना रहा है, जिससे लोग अपने घर या कार्यालय से ही सामान बुक कर सकेंगे और ट्रैकिंग सुविधा के माध्यम से पार्सल की स्थिति जान पाएंगे।
परिवहन विभाग के सूत्रों के अनुसार, नई पॉलिसी पर सरकार जल्द फैसला ले सकती है। यदि सब कुछ तय कार्यक्रम के अनुसार रहा तो अगले कुछ महीनों में संशोधित दरें पूरे प्रदेश में लागू कर दी जाएंगी। इससे न केवल आम उपभोक्ता को फायदा होगा, बल्कि एचआरटीसी की पार्सल सेवा को भी नई पहचान मिलेगी।
यह कदम राज्य सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत एचआरटीसी को आर्थिक रूप से और मजबूत बनाना है, साथ ही लोगों को बेहतर और सस्ती सुविधाएं प्रदान करनी हैं। नए बदलाव से हिमाचल के छोटे व्यापारियों, दुकानदारों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सबसे अधिक राहत मिलने की संभावना है।
