हिमाचल प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गतिविधियों के बीच आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में कैबिनेट की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक में राज्य सरकार कई बड़े निर्णय लेने जा रही है, जिनमें सबसे ज्यादा चर्चा आपदा राहत पैकेज और मेयर रोस्टर से जुड़े फैसलों को लेकर है। प्रदेश में पिछले कुछ महीनों से भारी बारिश, भूस्खलन और बादल फटने जैसी प्राकृतिक आपदाओं ने जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। सैकड़ों घर तबाह हुए, सड़कें बह गईं, खेती-बाड़ी को नुकसान हुआ और कई परिवार विस्थापित हो गए। ऐसे में राहत और पुनर्वास को लेकर जनता सरकार से ठोस कदम की उम्मीद कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक, आज की बैठक में सरकार आपदा प्रभावित परिवारों के लिए एक विशेष राहत पैकेज को अंतिम मंजूरी दे सकती है। इस पैकेज के तहत पूरी तरह से क्षतिग्रस्त मकानों के मालिकों को सात लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जा सकती है, जबकि आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त घरों के लिए तीन लाख रुपये तक की मदद तय हो सकती है। इसके अलावा दुकान, ढाबा, पशुधन और कृषि भूमि को हुए नुकसान की भरपाई के लिए भी नई दरें निर्धारित की जा सकती हैं। सरकार का दावा है कि यह राहत पैकेज अब तक का सबसे बड़ा और व्यापक पैकेज होगा, जो राज्य के सभी प्रभावित जिलों को कवर करेगा।
हालांकि इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच मतभेद भी बने हुए हैं। मुख्यमंत्री सुक्खू का कहना है कि केंद्र सरकार ने आपदा राहत के नाम पर सिर्फ प्रतीकात्मक मदद दी है, जबकि वास्तविक स्थिति कहीं अधिक गंभीर है। उन्होंने बार-बार यह भी कहा है कि राज्य सरकार अपने सीमित संसाधनों के बावजूद राहत पहुंचाने में कोई कमी नहीं छोड़ेगी। वहीं, विपक्ष ने सरकार पर राहत वितरण में देरी और राजनीतिक पक्षपात के आरोप लगाए हैं। इस पृष्ठभूमि में आज की कैबिनेट बैठक का निर्णय राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे जनता के बीच सरकार की साख प्रभावित हो सकती है।
बैठक का एक अन्य अहम मुद्दा मेयर रोस्टर को लेकर है। प्रदेश के कई नगर निगमों और नगर परिषदों में मेयर पदों की आरक्षण नीति को लेकर विवाद चल रहा है। शिमला, धर्मशाला, मंडी, सोलन और पालमपुर जैसे शहरों में स्थानीय निकायों के चुनावों के दौरान आरक्षण और रोटेशन को लेकर कई बार राजनीतिक खींचतान देखने को मिली है। कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने अपने-अपने स्तर पर इस मुद्दे को उठाया है। अब सरकार इस पर एक स्थायी नीति बनाने की दिशा में कदम बढ़ा सकती है। माना जा रहा है कि आज की बैठक में मेयर और डिप्टी मेयर पदों के लिए आरक्षण की नई व्यवस्था और रोस्टर सिस्टम को मंजूरी दी जा सकती है, ताकि आने वाले चुनावों से पहले स्थिति स्पष्ट हो सके।
इसके अलावा बैठक में प्रशासनिक ढांचे और वित्तीय सुधारों से जुड़े कई प्रस्तावों पर भी चर्चा हो सकती है। आपदा राहत कोष में पारदर्शिता लाने, पुनर्वास कार्यों में तेजी और प्रभावित इलाकों में बुनियादी ढांचे की मरम्मत से जुड़ी योजनाओं को भी प्राथमिकता दी जाएगी। मुख्यमंत्री पहले ही संकेत दे चुके हैं कि सरकार राहत कार्यों में किसी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं करेगी और सर्दियों से पहले पुनर्निर्माण के ज्यादातर काम पूरे करने का लक्ष्य है।
जानकारों का कहना है कि यह बैठक केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से भी अत्यंत संवेदनशील है। सुक्खू सरकार अपने कार्यकाल के मध्य चरण में है, और जनता अब सरकार से ठोस परिणामों की उम्मीद कर रही है। यदि आज की बैठक में आपदा राहत पैकेज पर निर्णायक फैसला लिया जाता है, तो इससे न केवल हजारों परिवारों को राहत मिलेगी बल्कि सरकार की छवि भी मजबूत होगी। दूसरी ओर, मेयर रोस्टर को लेकर निर्णय आने से स्थानीय निकायों के प्रशासनिक ढांचे में स्थिरता आएगी और आगामी शहरी निकाय चुनावों की तैयारियां भी सुगम होंगी।
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि आज की हिमाचल कैबिनेट बैठक राज्य की जनता, राजनीति और प्रशासन — तीनों के लिए बेहद अहम साबित हो सकती है। इस बैठक में लिए जाने वाले निर्णय न केवल आने वाले महीनों की दिशा तय करेंगे बल्कि यह भी स्पष्ट करेंगे कि सुक्खू सरकार जनता के भरोसे पर कितनी खरा उतरती है। अगर सरकार राहत और पुनर्वास की दिशा में ठोस कदम उठाती है, तो यह हिमाचल की आपदा से जूझती जनता के लिए बड़ी राहत और उम्मीद की किरण साबित होगी।
