हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अब मंदिरों की आय होगी पूरी तरह पारदर्शी, दान के दुरुपयोग पर दोषियों से होगी वसूली और कार्रवाई

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार को राज्यभर के मंदिरों की आय और दान राशि के उपयोग को लेकर एक ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाया। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि मंदिरों की आय और दान की रकम का प्रबंधन अब पूर्ण पारदर्शिता के साथ किया जाए ताकि जनता की आस्था से जुड़ी संपत्तियों का गलत इस्तेमाल न हो सके।


हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मंदिरों में चढ़ाई जाने वाली हर एक रकम का विस्तृत लेखा-जोखा रखना अनिवार्य होगा। इसके लिए मंदिर प्रशासन को आधुनिक तकनीक और डिजिटल व्यवस्था अपनाने का सुझाव भी दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि अब प्रत्येक मंदिर की आय, खर्च और दान से संबंधित सभी विवरण ऑनलाइन उपलब्ध करवाए जाएं, ताकि हर भक्त यह देख सके कि उसकी आस्था का पैसा कहां और कैसे उपयोग हो रहा है।

मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने कहा कि मंदिरों की आय केवल धार्मिक, सांस्कृतिक और जनकल्याणकारी कार्यों में ही खर्च होनी चाहिए। यदि किसी भी अधिकारी, पुजारी, ट्रस्ट सदस्य या कर्मचारी द्वारा दान की राशि का निजी उपयोग या दुरुपयोग पाया जाता है, तो उससे पूरी रकम वसूली जाएगी और उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई भी होगी।

कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा है कि मंदिरों के लेखा-जोखा की नियमित ऑडिट प्रक्रिया शुरू की जाए। प्रत्येक वर्ष मंदिरों की आय-व्यय का ऑडिट किया जाए और रिपोर्ट जनता के लिए वेबसाइट या सूचना पट्टों पर उपलब्ध करवाई जाए। इसके अलावा, ऑडिट में यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारी या ट्रस्ट सदस्य को तत्काल पद से हटाया जाए।

हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिए हैं कि मंदिरों की संपत्ति, भूमि और अन्य संसाधनों की सुरक्षा के लिए एक ठोस निगरानी तंत्र बनाया जाए। अदालत ने सरकार को आदेश दिया है कि मंदिरों की जमीन पर हो रहे अतिक्रमणों को तुरंत हटाया जाए और संबंधित विभाग इसकी निगरानी नियमित रूप से करे।

फैसले में यह भी कहा गया कि राज्य सरकार एक केंद्रीय डेटाबेस तैयार करे, जिसमें सभी मंदिरों की आय, दान, खर्च और चल रही योजनाओं का विवरण दर्ज हो। यह डेटाबेस सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहेगा ताकि हर नागरिक इस पर नज़र रख सके।

इस निर्णय का स्वागत करते हुए भक्तों, समाजसेवी संस्थाओं और विभिन्न धार्मिक संगठनों ने कहा कि यह फैसला हिमाचल की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नई दिशा देगा। कई लोगों ने इसे “आस्था की पारदर्शिता की ओर बड़ा कदम” बताया।

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि लंबे समय से यह शिकायतें मिलती रही हैं कि मंदिरों की दान राशि का गलत उपयोग किया जा रहा है या उसका सही लेखा नहीं रखा जा रहा। हाईकोर्ट के इस निर्णय से अब ऐसे मामलों पर अंकुश लगेगा और मंदिर प्रशासन जवाबदेह बनेगा।

राज्य सरकार ने भी अदालत के निर्देशों का स्वागत करते हुए कहा कि वह जल्द ही इसके लिए एक विस्तृत कार्ययोजना बनाएगी। सरकार ने संकेत दिए हैं कि मंदिरों की सभी वित्तीय गतिविधियों को डिजिटाइज किया जाएगा और हर लेनदेन को पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया जाएगा।

अदालत के इस आदेश से न केवल मंदिरों की वित्तीय व्यवस्था सुधरेगी, बल्कि श्रद्धालुओं का विश्वास भी और अधिक मजबूत होगा। धार्मिक संस्थानों के प्रति जवाबदेही बढ़ेगी और यह कदम पूरे प्रदेश में आस्था से जुड़े संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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