हिमाचल प्रदेश में सोमवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। 42 सवारियों से भरी एक निजी बस अचानक अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी, जिससे मौके पर चीख-पुकार मच गई। बस के गिरते ही यात्रियों के बीच अफरा-तफरी फैल गई, लोग एक-दूसरे को पुकारते हुए मदद की गुहार लगाने लगे। कई यात्री बस के अंदर बुरी तरह फंस गए, जबकि कुछ बस के बाहर फेंके गए। घटनास्थल पर ग्रामीणों ने बिना देर किए राहत कार्य शुरू किया और घायलों को बाहर निकालने की कोशिश की। इस दौरान कई लोगों ने अपने कपड़े फाड़कर पट्टियाँ बनाई और खून से लथपथ यात्रियों की मदद की।
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर शुरू किया गया। घायलों को एंबुलेंस से पास के सिविल अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि 10 यात्रियों की हालत बेहद गंभीर है, जबकि अन्य को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। बस पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी थी, और उसे निकालने के लिए क्रेन और जेसीबी की मदद ली गई। आसपास के ग्रामीणों और युवाओं ने बचाव दल का साथ दिया। प्रशासन ने घटनास्थल के आसपास ट्रैफिक को रोक दिया ताकि राहत कार्य में कोई बाधा न आए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह हादसा एक संकरे और खतरनाक मोड़ पर हुआ। बस तेज गति से नीचे उतर रही थी, तभी चालक का नियंत्रण अचानक वाहन से छूट गया। चालक ने ब्रेक लगाने की कोशिश की, लेकिन ब्रेक फेल हो जाने के कारण बस सीधे सड़क किनारे लगी रेलिंग तोड़ती हुई गहरी खाई में जा गिरी। बस गिरते ही जोरदार धमाका हुआ और धूल का गुबार चारों ओर फैल गया। लोग दौड़कर नीचे पहुंचे तो दृश्य भयावह था। बस का अगला हिस्सा पूरी तरह दब चुका था और यात्री अंदर फंसे हुए थे। कुछ लोगों को निकालने के लिए गैस कटर का सहारा लिया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सड़क की स्थिति लंबे समय से खराब है। कई बार प्रशासन से इसकी मरम्मत और मजबूत रेलिंग लगाने की मांग की गई थी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। हादसे के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। यह सड़क क्षेत्र के सबसे खतरनाक मार्गों में से एक मानी जाती है, जहाँ पहले भी कई दुर्घटनाएँ हो चुकी हैं।
जिला प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य का जायजा लिया। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि बस चालक घायल है लेकिन खतरे से बाहर है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि बस के ब्रेक फेल हो गए थे। चालक ने कहा कि उसने वाहन को संभालने की पूरी कोशिश की, लेकिन मोड़ पर बस फिसल गई और खाई में जा गिरी। पुलिस ने चालक का बयान दर्ज कर लिया है और मामले में एफआईआर दर्ज कर दी गई है।
फोरेंसिक टीम भी घटनास्थल पर पहुंची और बस के मलबे की जांच शुरू की। अधिकारियों के अनुसार, यह भी जांच की जा रही है कि बस की तकनीकी स्थिति क्या थी और क्या उसकी फिटनेस रिपोर्ट वैध थी। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई कि बस की फिटनेस सर्टिफिकेट की अवधि समाप्त हो चुकी थी, फिर भी वह सड़कों पर दौड़ रही थी। साथ ही यह भी पाया गया कि बस में निर्धारित संख्या से अधिक यात्री सवार थे। कई लोग दरवाजे और पिछली सीढ़ियों पर खड़े होकर सफर कर रहे थे।
दुर्घटना के बाद मुख्यमंत्री ने गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह बेहद दर्दनाक घटना है और सरकार हर संभव सहायता देगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राहत और बचाव कार्य में किसी तरह की लापरवाही न हो। उन्होंने घायलों के परिजनों से फोन पर बात कर हर संभव मदद का भरोसा दिया। जिला प्रशासन ने गंभीर घायलों के इलाज के लिए तत्काल आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी मरीज को इलाज में कोई परेशानी न हो।
अस्पतालों में अतिरिक्त डॉक्टर और नर्सें तैनात कर दी गई हैं। कई घायल यात्रियों को हेलिकॉप्टर से शिमला और चंडीगढ़ के अस्पतालों में रेफर किया गया। डॉक्टरों के अनुसार, कुछ मरीजों की हालत बेहद गंभीर है और उन्हें आईसीयू में रखा गया है। परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। अस्पताल के बाहर भीड़ लगी हुई है, लोग अपने परिचितों का हाल जानने के लिए बेचैन हैं।
राहत कार्य में स्थानीय युवाओं और स्वयंसेवकों की भूमिका अहम रही। कई युवाओं ने रस्सियों की मदद से नीचे उतरकर घायलों को बाहर निकाला। उन्होंने पूरी रात घटनास्थल पर रहकर मदद की। जिला अधिकारी ने उनके साहस की सराहना की और कहा कि अगर स्थानीय लोग न होते तो नुकसान और भी ज्यादा होता। प्रशासन ने उन सभी को सम्मानित करने की घोषणा की है जिन्होंने बचाव कार्य में सक्रिय भूमिका निभाई।
दूसरी ओर, परिवहन विभाग ने सभी निजी बस संचालकों को वाहनों की तकनीकी जांच कराने का आदेश दिया है। सभी बसों को फिटनेस रिपोर्ट जमा करनी होगी और बिना जांच के किसी भी वाहन को सड़क पर उतरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही, बस चालकों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर भी लगाए जाएंगे ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएँ दोबारा न हों।
हादसे के बाद लोगों में गुस्सा और निराशा दोनों है। सोशल मीडिया पर लोग सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कई लोगों ने सड़क सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं और कहा है कि सरकार केवल कागज़ों में योजनाएँ बनाती है, ज़मीनी स्तर पर कुछ नहीं करती। स्थानीय संगठनों ने सड़क की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर धरना देने का ऐलान किया है।
रात भर राहत कार्य जारी रहा। बचाव दल को गहरी खाई में उतरने में काफी कठिनाई हुई। अंधेरा और फिसलन के कारण काम मुश्किल था, लेकिन फिर भी टीम ने हार नहीं मानी। सुबह तक अधिकांश घायलों को बाहर निकाल लिया गया। कुछ यात्रियों की हालत अभी भी गंभीर बताई जा रही है। बस को क्रेन की मदद से ऊपर लाया गया, लेकिन वह पूरी तरह मलबे में तब्दील हो चुकी थी।
जिला प्रशासन ने फिलहाल उस सड़क को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। सड़क की मरम्मत और रेलिंग को दोबारा मजबूत किया जा रहा है। साथ ही, चेतावनी बोर्ड लगाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। पुलिस ने कहा है कि अगर बस मालिक की लापरवाही साबित होती है तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
हादसे से जुड़ी जांच के लिए विशेष समिति गठित कर दी गई है जो तकनीकी और प्रशासनिक दोनों पहलुओं की जांच करेगी। रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। राज्य सरकार ने यह भी घोषणा की है कि आने वाले महीनों में पहाड़ी सड़कों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।
यह हादसा एक बार फिर पहाड़ी राज्यों में सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। हर साल सैकड़ों लोग इन सड़कों पर हादसों में जान गंवाते हैं, लेकिन सुधार के नाम पर केवल वादे किए जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन समय रहते सड़क की मरम्मत कर देता तो यह हादसा टल सकता था।
हादसे ने पूरे इलाके में शोक की लहर फैला दी है। गांवों में मातम का माहौल है। लोग एक-दूसरे से कह रहे हैं कि यह घटना उन्हें कभी नहीं भूल पाएंगे। मंदिरों में मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की जा रही है। स्कूलों में बच्चों ने दो मिनट का मौन रखा। प्रशासन ने कहा है कि हादसे में मृतकों और घायलों के परिवारों की हर संभव मदद की जाएगी।
यह घटना हिमाचल की कठिन सड़कों और कमजोर सुरक्षा इंतजामों की सच्चाई को उजागर करती है। पहाड़ों की घुमावदार सड़कों पर छोटी सी गलती भी जानलेवा साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब समय आ गया है कि सरकार सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे। दुर्घटना स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे, साइन बोर्ड और मजबूत रेलिंग जरूरी हैं ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियां दोबारा न हों।
