हिमाचल प्रदेश में चल रही मणिमहेश यात्रा के दौरान बड़ा हादसा सामने आया है। जन्माष्टमी से लेकर राधाष्टमी तक के बीच अब तक 16 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। अधिकतर यात्रियों की मौत दिल का दौरा पड़ने, ठंड लगने और रास्ते की कठिनाईयों की वजह से बताई जा रही है। वहीं, लगातार खराब मौसम और भूस्खलन के कारण करीब 5,000 यात्री रास्ते में ही फंसे हुए हैं।
मणिमहेश यात्रा क्यों है खास?
मणिमहेश यात्रा हर साल जन्माष्टमी से राधाष्टमी तक आयोजित होती है। यह यात्रा भगवान शिव को समर्पित मानी जाती है और लाखों श्रद्धालु इस दौरान मणिमहेश झील तक पहुंचकर पवित्र स्नान करते हैं। झील तक पहुंचने के लिए तीर्थयात्रियों को ऊंचे पहाड़ों और कठिन रास्तों से गुजरना पड़ता है।
इस बार क्यों बढ़ी मुश्किलें?
खराब मौसम और भूस्खलन
- भारी बारिश और लैंडस्लाइड की वजह से रास्ते कई जगह अवरुद्ध हो गए हैं।
- सड़कें टूटने और पहाड़ों से पत्थर गिरने के कारण यात्रियों को लंबे जाम का सामना करना पड़ रहा है।
अत्यधिक भीड़
- इस बार अनुमान से कहीं ज्यादा श्रद्धालु यात्रा में शामिल हुए।
- अचानक भीड़ बढ़ने से प्रशासन के लिए प्रबंधन मुश्किल हो गया।
स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ
- ऊंचाई वाले इलाकों में ऑक्सीजन की कमी और ठंडे मौसम में कई यात्रियों की तबीयत बिगड़ गई।
- डॉक्टरों के मुताबिक, अधिकतर मौतें हार्ट अटैक और हाइपोथर्मिया के कारण हुईं।
प्रशासन की स्थिति और तैयारी
- प्रशासन ने फंसे हुए करीब 5,000 यात्रियों को सुरक्षित निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया है।
- मेडिकल कैंप, राहत शिविर और हेल्पलाइन नंबर सक्रिय कर दिए गए हैं।
- यात्रियों से अपील की गई है कि वे प्रशासन की सलाह के बिना यात्रा जारी न रखें।
श्रद्धालुओं और परिवारों के लिए संदेश
- यात्रियों को यात्रा पर निकलने से पहले अपने स्वास्थ्य की जांच कराने की सलाह दी जा रही है।
- भारी बारिश और लैंडस्लाइड की संभावना को देखते हुए अगले कुछ दिनों तक यात्रा स्थगित करने की अपील की जा रही है।
- मृतक श्रद्धालुओं के परिवारों को प्रशासन की ओर से सहायता राशि देने की घोषणा भी की जा सकती है।
👉 कुल मिलाकर, इस बार मणिमहेश यात्रा श्रद्धालुओं के लिए बेहद कठिन साबित हुई है। लगातार खराब मौसम, रास्ते की दुश्वारियाँ और स्वास्थ्य समस्याएँ मिलकर बड़ी चुनौती बन गई हैं। प्रशासन यात्रियों की मदद में जुटा है, लेकिन हालात अभी भी चिंताजनक हैं।
